Friday, May 29, 2009

........और चारो ओर यवनिका-ही-यवनिका

१९९२ में यवनिका ने सबसे पहले सफ़दर हाश्मी का मशहूर नाटक "औरत ' का मंचन कर आरा सहित शिमला ,सोलन,नागपुर,नैनीताल, पटना आदि शहरो में धूम मचा दिया .हर तरफ़ संस्था की चर्चा होने लगी.यह क्रम २-३ साल तक चला .संस्था बाहर मंचन करने से ज्यादा अपने शहर में नाटक कर समाज सेवा करना चाहती थी,यहाँ का माहौल नाटकों के अनूकुल नहीं था ,लोग नाच देखने में ज्यादा ही आनन्द उठाते थे। नाटक करना अभिशाप के सामान था ,ऐसे में हमलोगों ने बक्सी सुधीर प्रसाद तथा बक्सी नीलम सिन्हा के संरक्षण मेंदृढ़ संकल्प लिया .चंद्र भूषण पाण्डेय,संजय शाश्वत,मयंक भारद्वाज,स्वयम्बरा, प्रियम्बरा,अपर्णा वर्मा,श्वेता,कमलेश.अख्तर आलम,निसार आलम,मधुकर आनंद,सोनू आदि ने संस्था को आगे रखने में कोई कसरनहीं छोरा । उस समय अनेक नाटकों का मंचन हुआ ---संजय शाश्वत-स्वयम्बरा के निर्देशन में टंकारा का गाना ,मुख्य मंत्री ,कन्या दान ,मुआवजे,अंधेर नगरी,आदि नाटक किए गए.दो साल तक संस्था आरा के कालेजो में सेमिनार,युवा-कवि-सम्मलेन,भाषण प्रतियोगिता,सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आदि क्रायक्रम कराती रही.यवनिका युवाओं के बीचखास तरह से चर्चित रही .शहर में प्रतियोगिता का माहौल बनता गया ,हर साल वहां से प्रतियोगिता के माध्यम से सैकडों विद्यार्थी नौकरी पकड़ते गए।
आरा में लड़कियों का नाटक में काम करना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी ,ऐसे में स्वयम्बरा-प्रियम्बरा ने हर नाटक में जमकर भाग लिया .नाटक करने के लिए चंदा उगाही में भी बढ़ -चढ़कर हिस्सा लिया,धीरे-धीरे लोगों ने अपनी लड़कियों को नाटक में आगे लाने लगे .आरा की पहचान कला क्षेत्र में विशेष होने लगी.......क्रमश:

6 comments:

  1. हिंदी ब्लॉगिंग जगत में आपका स्वागत है. हमारी शुभ कामनाएं आपके साथ हैं । अगर वर्ड वेरीफिकेशन को हटा लें तो टिप्पणी देने में सुविधा होगी ओर आपके ब्लोग पर टिप्पणीयां भी ज्यादा आएंगी क्योंकि अधिकतर टिप्पणीकार word verification देखते ही भाग जाते हैं । word verification हटाने का आसान तरीका यहां है ।

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